मैंने अपनी पिछली किसी पोस्ट् में एक बार कहा था कि मैं अपनी आगामी पोस्ट में कुछ तत्व संबंधी remedy की बात करूंगा। आज सोचा कि आपको जल तत्व की रेमेडी के बारे में बताया जाय। मेरे पास बहुत लोगों का feedback आ रहा है कि मेरी सभी पोस्ट गहरी और तार्किक तो है लेकिन काफी लंबी हो रही है, जिससे हर आदमी को पढ़ने में थोड़ी असहजता महसूस हो रही है।
इसी बात को ध्यान में रखते हुए, मैं अपनी पोस्ट में कोशिश करूंगा कि वो ज्यादा लंबी न हो, चाहे तो उसको कुछ पार्ट में लिख दिया जाय। आज मैं जल तत्व की केवल एक ही रेमेडी की बात करूंगा और ये रेमेडी नहीं बल्कि एक daily ritual है जिसको अगर व्यक्ति अपने routine में शामिल कर ले तो उसकी जल तत्व राशियाँ यानि कर्क, वृश्चिक और मीन और उसमे बैठे ग्रह अपने आप संतुलित होने शुरू हो जाते है। इसी प्रकार यदि व्यक्ति को चन्द्र या राहू ग्रह से संबन्धित कोई भी परेशानी हो तो भी इससे संतुलन में मदद मिलती है ।
आज जो मैं जल तत्व की रेमेडी बताने जा रहा हूँ वो है “स्नान मंत्र”। जी हाँ आपने सही सुना कि सुबह नहाते वक़्त केवल 7-9-11 बार स्नान मंत्र बोलकर नहाने से उपरोक्त बताए गए ग्रह और राशियाँ संतुलित होने लगती है। बस जरूरत है इसको विश्वास के साथ करने की। हो सकता है कि कुछ लोगों को ये मज़ाक लगे, लेकिन यकीन मानिए आप इसका प्रभाव प्रत्यक्ष रूप से महसूस करेंगे यदि आप इसको अपने रूटीन में लगातार अनिवार्य रूप से ले आए। अब इसके पीछे का लॉजिक समझते है ।
स्नान मंत्र है क्या ? स्नान मंत्र है – ॐ गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती। नर्मदे सिंधु कावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥
इस मंत्र के माध्यम से हम भारत की सात पवित्र नदियों का आह्वान अपने साधारण स्नान के जल में करते हैं ।
इसके पीछे का ज्योतिषीय एवं वैज्ञानिक तर्क (Logic)
- जल की स्मृति (Water Memory)
आधुनिक विज्ञान, विशेषकर डॉ. मसारू इमोटो (Dr. Masaru Emoto) के शोध यह बताते हैं कि जल में याददाश्त (Memory) होती है। जल अपने आसपास के शब्दों, भावनाओं और ध्वनियों की ऊर्जा को सोख लेता है।
तर्क: जब आप स्नान के जल को डालते वक्त पवित्र नदियों के नाम और मंत्र का उच्चारण करते हैं, तो जल के अणुओं (Molecules) की संरचना बदल जाती है।
प्रभाव: मंत्र की सकारात्मक फ्रीक्वेंसी साधारण जल को एक ‘हिलिंग लिक्विड’ में बदल देती है, जो आपके शरीर के संपर्क में आते ही कोशिकीय स्तर (Cellular Level) पर शांति पहुँचाती है। जब हम स्नान मंत्र का जाप करते हैं, तो हम जल की ऊर्जा को बदल रहे होते हैं। वह साधारण जल को एक ‘हिलिंग टूल’ (Healing Tool) में बदल कर सीधे आपके सबकॉन्शियस (Subconscious) पर काम करता है।
- ध्वनि तरंगों का प्रभाव (Sound Vibrations)
संस्कृत के मंत्रों को इस तरह से बनाया गया है कि उनके उच्चारण से विशिष्ट कंपन (Vibrations) पैदा होते हैं।
तर्क: ‘ॐ’ और पवित्र नदियों के नामों का उच्चारण हमारे मस्तिष्क की अल्फा तरंगों (Alpha Waves) को सक्रिय करता है।
प्रभाव: यह स्नान के दौरान आपको गहरे ध्यान (Meditative State) जैसी स्थिति में ले जाता है, जिससे तनाव कम होता है और एकाग्रता बढ़ती है।
- हाइड्रोथेरेपी और मानसिक कंडीशनिंग
मनोविज्ञान में किसी क्रिया को मंत्र या प्रतिज्ञा (Affirmation) के साथ जोड़ना ‘एंकरिंग’ कहलाता है।
तर्क: जब आप रोज सुबह एक ही मंत्र के साथ स्नान करते हैं, तो आपका मस्तिष्क उस समय को ‘शुद्धिकरण और नई शुरुआत’ के रूप में पहचान लेता है।
प्रभाव: ज्योतिष में कर्क (4), वृश्चिक (8) और मीन (12) जल तत्व की राशियाँ हैं। हमारे संचित कर्म और पिछले जन्मों की यादें जल तत्व में संग्रहित होती हैं। स्नान के दौरान मंत्रों का प्रयोग इन राशियों में बैठे खराब ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को धोने का काम करता है।
- बायो-मैग्नेटिक फील्ड (Aura) की सफाई
हमारा शरीर एक विद्युत-चुंबकीय क्षेत्र (Electromagnetic Field) से घिरा होता है। दिनभर के तनाव और नकारात्मक विचारों से यह क्षेत्र ‘अशुद्ध’ हो जाता है।
तर्क: पवित्र मंत्रों से अभिमंत्रित जल जब शरीर पर गिरता है, तो वह इस आभा मंडल (Aura) को रीसेट कर देता है।
प्रभाव: मंत्रोच्चार के साथ स्नान करने से आप शारीरिक सफाई के साथ-साथ अपनी ऊर्जा का भी शुद्धिकरण कर लेते हैं। चंद्रमा हमारे मन का कारक है और चंद्रमा की सबसे बड़ी रेमेडी जल की शुद्धि है। स्नान मंत्र के साथ किया गया स्नान न केवल शरीर को साफ करता है, बल्कि आपके ‘आभामंडल’ (Aura) को भी संतुलित करता है, जिससे मानसिक तनाव कम होता है। राहू को ‘जहर’ या नकारात्मक विचारो का कारक माना जाता है। जब हम पवित्र नदियों का आह्वान करते हैं, तो वह जल अमृत तुल्य हो जाता है, जो राहू द्वारा पैदा किए गए भ्रम और अशांति को शांत करने की शक्ति रखता है।
दैनिक अनुष्ठान (Daily Kriya) की शक्ति: मेरे गुरु जी इस बात पर जोर देते हैं कि बड़ी-बड़ी पूजाओं से ज्यादा असरदार वो ‘दैनिक क्रियाएं’ (Daily Kriyas) होती हैं जिन्हें हम नियम से करते हैं। उनके अनुसार, एक छोटा सा मंत्र भी अगर रोज 7, 9 या 11 बार पढ़ा जाए, तो वह धीरे-धीरे आपके भाग्य की रेखाओं को बदलने की क्षमता रखता है। यह घर बैठे ही पवित्र तीर्थों में स्नान करने के समान पुण्य प्रदान करता है ।
निष्कर्ष: ब्रह्मांड की सबसे बड़ी शक्तियां सरलता में छिपी हैं। स्नान मंत्र का यह छोटा सा प्रयोग आपके जल तत्व को शुद्ध कर आपके भाग्य के द्वार खोल सकता है। बस जरूरत है तो पूर्ण विश्वास और निरंतरता की।









