अभी कुछ समय पहले मैं एक यूट्यूब पर एक गुरुजी का प्रवचन सुन रहा था तो उन्होने उसमे एक बात कही कि जो भी ज्योतिष का विद्यार्थी हो उसे नारद पुराण अवश्य पढ़नी चाहिए। हालांकि मुझे इस बात का थोड़ा सा तो ज्ञान था कि इस ग्रंथ में ज्योतिष संबंधी काफी बाते बताई गयी है लेकिन कभी इसको पढ़ा नहीं। अब इसको मैंने पढ़ना शुरू किया तो वाकई इसमे कई बाते काफी गूढ और रहस्य वाली है। तो मैंने आज सोचा कि जो जानकारी मुझे अच्छी लगी उसमे से एक बात आपसे share करनी चाहिए।
जीवन में कई बार ऐसा समय आता है जब इंसान चारों तरफ से परेशानियों और दुखों से घिर जाता है। लाख कोशिशों के बाद भी असफलता हाथ लगती है, स्वास्थ्य खराब रहने लगता है या मानसिक तनाव बढ़ जाता है। ज्योतिष शास्त्र में इन सभी कष्टों और दुखों का मुख्य कारक शनि देव को माना गया है। शनि देव को ‘कर्म कारक’ भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि हमें जीवन में जो भी पीड़ा मिलती है, वह हमारे अपने कर्मों के आधार पर ही मिलती है। इसके अलावा, शनि देव हमारे करियर, जॉब और प्रोफेशन के भी मुख्य कारक हैं। इसलिए यदि किसी व्यक्ति को अपने कार्यक्षेत्र में बार-बार बाधाएं, असफलता, नौकरी छूटने का डर या व्यापार में भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, तो उसके लिए नारद पुराण में वर्णित यह उपाय अत्यंत प्रभावी सिद्ध होता है।
इस नारद पुराण में ज्योतिष स्कन्ध में शनि देव के प्रकोप से बचने के लिए एक बहुत ही अद्भुत सूत्र दिया गया है:
“शनिश्चर जिस नक्षत्र में विद्यमान हो, उस नक्षत्र से जुड़े वृक्ष का पूजन अतिशीघ्र लाभ देगा।”
इसका अर्थ है कि जिस नक्षत्र में वर्तमान में शनि देव गोचर कर रहे हो उस नक्षत्र से जुड़े वृक्ष की पूजा करने से शनि देव अतिशीघ्र प्रसन्न होते है।
आइए विस्तार से समझते हैं कि यह उपाय इतना प्रभावी क्यों है, इसे कब और कैसे करना चाहिए (गोचर बनाम जन्मकालीन स्थिति), इन पेड़ों की पूजा की सही विधि क्या है, और क्या इन्हें लगाया भी जा सकता है।
यह उपाय इतना प्रभावी क्यों है? (इसके पीछे का तर्क और लॉजिक)
बहुत से लोग यह सवाल कर सकते हैं कि सिर्फ एक पेड़ की पूजा करने से शनि देव के कष्ट या करियर की बाधाएं कैसे दूर हो सकती हैं? इसके पीछे बहुत ही ठोस आध्यात्मिक और ऊर्जावान विज्ञान (Energy Science) काम करता है:
- वायु तत्व की समानता: वृक्ष (पेड़) का सबसे मुख्य और प्राथमिक तत्व ‘वायु तत्व’ (Air Element) है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि देव का मूल तत्व भी वायु ही माना गया है। जब आप शनि देव से जुड़े नक्षत्र के पेड़ की पूजा करते हैं, तो आप सीधे तौर पर शनि देव के मूल तत्व के साथ तालमेल बिठा रहे होते हैं।
- ऊर्जा का आदान-प्रदान (Energy Exchange): जब जीवन में शनि देव की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा का कठिन दौर चलता है, या करियर में अड़चनें आती हैं, तो हमारे शरीर के चारों ओर का औरा (Aura) नकारात्मक ऊर्जा और तनाव से भर जाता है। जब आप अपने निर्धारित नक्षत्र वृक्ष के पास जाते हैं, तो उस पेड़ की शक्तिशाली प्राण-वायु और प्राकृतिक औरा आपके शरीर की नकारात्मक ऊर्जा को खींचकर उसे शुद्ध (Cleanse) कर देती है।
- प्राणवायु का अवरोध दूर होना: जीवन में जब काम रुकने लगते हैं या जॉब-बिजनेस में stagnation आ जाता है, तो इसका मतलब होता है कि शरीर और भाग्य में ऊर्जा का प्रवाह (Flow of Prana) रुक गया है। वृक्षों की शरण में जाने और वहाँ प्राणायाम करने से वह रुका हुआ प्राण-प्रवाह फिर से सक्रिय हो जाता है।
- सबसे बड़ा देव कथन: मेरे अपने व्यक्तिगत विचार से अगर किसी कथन को किसी देव द्वारा बताया गया है तो वो अपने आप में ही स्वयम सिद्ध कथन होता है तो हमे उस पर शंका नहीं करनी चाहिए। नारद पुराण के वक्ता स्वयं महर्षि नारद मुनि हैं। उन्होंने इसे सनकादि ऋषियों और अन्य जिज्ञासुओं को सुनाया था। इसे महर्षि वेद व्यास द्वारा संकलित किया गया है, जिन्होंने सभी वेदों और महापुराणों को व्यवस्थित रूप दिया था।
कब देखें जन्मकालीन नक्षत्र का पेड़ और कब वर्तमान गोचर का?
अब एक शंका हो सकती है कि इस सूत्र के हिसाब से तो वर्तमान शनि देव के गोचर को देखना चाहिए लेकिन यहाँ मेरा मत इस प्रकार है कि पाठकों के मन में यह स्पष्टता होनी चाहिए कि वे किस पेड़ की पूजा करें—मतलब अपनी जन्म कुंडली में शनि देव के नक्षत्र वाले पेड़ की या वर्तमान गोचर में चल रहे शनि देव के नक्षत्र के पेड़ की? इसे इन दो स्पष्ट स्थितियों से समझें:
- वर्तमान शनि देव के गोचर के अनुसार पेड़ की पूजा कब करें?
- परिस्थिति: जब समाज में, देश में या सामूहिक रूप से कोई कठिन समय चल रहा हो, या आपको अचानक किसी नए कार्य में बड़ी बाधा, तात्कालिक मानसिक अशांति, गोचर जनित परेशानी (जैसे शनि की ढैय्या, कंटक या साढ़ेसाती का कोई विशेष चरण) या हाल ही में जॉब/कारोबार में अचानक संकट आया हो।
- कैसे देखें: पंचांग या किसी भी ऑनलाइन ज्योतिषीय माध्यम से यह देखें कि वर्तमान समय में गोचर करते हुए शनिदेव किस नक्षत्र में विद्यमान हैं। उस समय तात्कालिक राहत पाने के लिए गोचर वाले नक्षत्र के पेड़ की पूजा की जानी चाहिए। जैसे इस समय शनि देव रेवती नक्षत्र में गोचर कर रहे है तो रेवती नक्षत्र का पेड़ महुआ बनता है तो वर्तमान में महुए के पेड़ की पूजा करनी चाहिए। इसमे एक बात और add करना चाहूँगा कि महुए के पेड़ के विषय में, मैं एक पोस्ट पहले भी डाल चुका हूँ, जिसमे इस पेड़ की महत्ता को वर्णित किया गया है तो आप इस पोस्ट को भी दोबारा से पढे, इसका लिंक यहाँ साथ में दे रहा हूँ-
माँ कामाख्या का कल्पवृक्ष: ‘महुआ’ के पेड़ में छिपा सुख-समृद्धि और तंत्र का गुप्त रहस्य
जन्मकालीन शनि देव के नक्षत्र के पेड़ की पूजा कब करें?
- परिस्थिति: जब आपके जीवन में कोई बहुत गहरा, पुराना और बार-बार उभरने वाला कार्मिक संकट हो (जैसे लगातार कई सालों से करियर में असफलता, बार-बार नौकरी बदलना, या जीवन का कोई ऐसा बड़ा संघर्ष जो पीछा न छोड़ रहा हो)।
- कैसे देखें: अपनी जन्म कुंडली खोलकर देखें कि जन्म के समय शनि ग्रह किस नक्षत्र में बैठे थे। वह आपका ‘आजीवन कार्मिक नक्षत्र’ है। जीवन के दीर्घकालिक और गहरे संकटों से उबरने के लिए हमेशा जन्मकालीन नक्षत्र के पेड़ की पूजा या सेवा करनी चाहिए।
सभी 27 नक्षत्रों और उनके प्रतिनिधि वृक्षों की सारणी
अपने वर्तमान गोचर या जन्म कुंडली के अनुसार सही पेड़ की पहचान करने के लिए नीचे दी गई तालिका का उपयोग करें:
क्रम | नक्षत्र का नाम | प्रतिनिधि वृक्ष | क्रम | नक्षत्र का नाम | प्रतिनिधि वृक्ष |
1 | अश्विनी | कुचला | 15 | स्वाति | अर्जुन |
2 | भरणी | आंवला | 16 | विशाखा | नागकेसर |
3 | कृत्तिका | गूलर | 17 | अनुराधा | मौलश्री |
4 | रोहिणी | जामुन | 18 | ज्येष्ठा | रीठा |
5 | मृगशिरा | खैर | 19 | मूल | शाल/साल |
6 | आर्द्रा | पीपली/ शीशम | 20 | पूर्वाषाढ़ा | अशोक |
7 | पुनर्वासु | बांस | 21 | उत्तराषाढ़ा | कटहल |
8 | पुष्य | पीपल | 22 | श्रवण | आक |
9 | अश्लेषा | चंपा | 23 | धनिष्ठा | शमी |
10 | मघा | बरगद | 24 | शतभिषा | कदंब |
11 | पूर्वा फाल्गुनी | पलाश | 25 | पूर्वाभाद्रपद | आम |
12 | उत्तरा फाल्गुनी | पाकड़ | 26 | उत्तराभाद्रपद | नीम |
13 | हस्त | चमेली | 27 | रेवती | महुआ |
14 | चित्रा | बेल |
नक्षत्र वृक्षों की पूजा, दीपक और प्राणायाम की विशेष विधि
इन वृक्षों से पूरा लाभ प्राप्त करने के लिए नीचे दी गई सरल और सटीक विधि का पालन करें:
- पेड़ का चयन: अपनी स्थिति (गोचर या जन्म कुंडली) के अनुसार ऊपर बताए गए नियमों के आधार पर अपने नक्षत्र के प्रतिनिधि वृक्ष का चुनाव करें। लेकिन इसमे मेरा एक मत यह है कि अगर हम दोनों ही पेड़ों की पूजा करे तो निश्चित ही सारे अवरोध दूर हो जाएंगे।
- पूजा का दिन और समय: यह उपाय विशेष रूप से शनिवार के दिन करना सबसे उत्तम माना जाता है। सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर वृक्ष के पास जाएं।
- जल और सरसों के तेल का दीपक: वृक्ष को शुद्ध जल अर्पित करें। इसके बाद पेड़ के नीचे शुद्ध सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
- परिक्रमा (प्रदक्षिणा): वृक्ष की श्रद्धापूर्वक 7 बार परिक्रमा करें। परिक्रमा करते समय मन ही मन शनिदेव से अपने कष्टों, करियर की बाधाओं और जीवन के अवरोधों के निवारण की प्रार्थना करें।
- प्राणायाम और ॐ का उच्चारण: पेड़ के पास कुछ समय शांत बैठकर पद्मासन या सुखासन में बैठें। चूंकि पेड़ और शनि दोनों का संबंध वायु तत्व से है, इसलिए वृक्ष के नीचे बैठकर गहरी साँसें लेते हुए प्राणायाम करें और ‘ॐ’ का मानसिक या मुख से स्पष्ट उच्चारण करें। ऐसा करने से वृक्ष की प्राण-वायु और आपकी आंतरिक ऊर्जा मिलकर आपके औरा को पूरी तरह चार्ज और शुद्ध कर देती है।
क्या इन्हें लगाया भी जा सकता है?
हाँ! पूजा के अलावा यदि आप अपने नक्षत्र या गोचर से जुड़े पौधे को अपने घर के आसपास, किसी मंदिर या सार्वजनिक स्थान पर अपने हाथों से लगाते हैं और उसकी देखभाल करते हैं, तो यह पूजा से भी कई गुना अधिक फलदायी होता है। पेड़ के बड़ा होने के साथ-साथ आपकी सकारात्मक ऊर्जा और सुरक्षा कवच भी मजबूत होता है।
नारद पुराण का यह सूत्र केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ जुड़कर अपने भीतर की ऊर्जा को ठीक करने का एक अचूक विज्ञान है। जब करियर में तात्कालिक संकट हो तो वर्तमान गोचर के नक्षत्र वृक्ष की शरण लें, और जब जीवन का गहरा संघर्ष हो तो अपनी जन्मकुंडली के नक्षत्र वृक्ष को चुनें। शनिवार के दिन जाकर सरसों के तेल का दीपक जलाएं, वृक्ष की सेवा करें, प्राणायाम व ॐ का उच्चारण करें या संभव हो तो एक नया पौधा रोपकर उसकी रक्षा करें। प्रकृति की इस सरल शरण से आपके जीवन और कार्यक्षेत्र के सारे अवरोध स्वतः समाप्त होने लगेंगे।










