लेखक का परिचय

इस “धर्म सिंधु” साइट का मुख्य उद्देश्य सभी लोगों को अपने हिन्दू सनातन धर्म के अनोखे ज्ञान की गहराई से कुछ अंश उपलब्ध कराना है, क्योंकि हमारी सनातन संस्कृति पूरे ब्रह्मांड के व्यावहारिक ज्ञान का आधार हैं। यह संस्कृति जीवन के अलग-अलग आयामों के बारे में जानकारी देती हैं। यहाँ असंख्य ऋषि मुनियों ने तप करके जो ज्ञान अर्जित किया उसकी हर एक बून्द हमारे समाज के लिए एक बहुमूल्य उपहार है। हालाँकि मैं इतनी महान संस्कृति की व्याख्या करने के योग्य नहीं हूँ, फिर भी मेरी इष्ट देवी “माँ ललिता महात्रिपुरसुन्दरी” की कृपा से मैं इसमें जो कुछ भी लिख पाऊँगा, उसे मैं अपने ऊपर उनका आशीर्वाद ही मानूंगा।

मेरे परिचय में कहने के लिए ज़्यादा कुछ नहीं है। मेरा नाम शशि कान्त सिंघल है और मैं पिछले 25 वर्षों से कॉर्पोरेट जगत में एक उच्च वित्त प्रबंधक की यात्रा कर रहा हूँ लेकिन हृदय में आध्यत्मिकता और ज्योतिष रची बसी है। इसीलिए पिछले 6 वर्षो से इस पर कार्य कर रहा हूँ। ज्योतिष के क्षेत्र में मैंने वर्ष 2024 में IGNOU, नई दिल्ली से M.A. (JYOTISH) पूर्ण किया। इसके अतिरिक्त वर्ष 2021 में वाराणसी स्थित भारतीय वैदिक ज्योतिष संस्थान से “ज्योतिष विद्या विशारद” तथा 2020 में AIFAS, दिल्ली से “ज्योतिष रत्न” की उपाधि प्राप्त की। वर्ष 2021 में मैं अपने ज्योतिष गुरु श्री दीपांशु गिरि जी के संपर्क में आया और मेरी जिंदगी पूरी तरह से बदल गयी। उनके  मार्गदर्शन में निरंतर उन्नत ज्योतिष पाठ्यक्रमों का अध्ययन कर रहा हूँ। हालांकि उनके अलावा भी, मुझे अपनी ज्योतिष सिखने की यात्रा में अनेक गुरुओं का मार्गदर्शन मिला जिनमे श्री अभिजीत कृष्णन जी, श्री संजय रथ जी मुख्य है। अभी वर्तमान में, मैं एक आध्यात्मिक और ज्योतिष गुरु श्री दत्तात्रेय तापकीर जी के निर्देशन में ज्योतिष में PHD कर रहा हूँ।

बस इतना कह सकता हूँ कि जो भी ज्ञान मेरे पास है, वह मेरे सभी गुरुओं का आशीर्वाद है। मेरे गुरुओं ने मुझे ज्योतिष के साथ-साथ कई गुप्त रहस्यों के बारे में भी जानकारी दी। इस साइट के ज़रिए गुप्त ज्ञान की इस गंगा को आगे बढ़ाना ही मेरा लक्ष्य है।

लेखक का परिचय

इस “धर्म सिंधु” साइट का मुख्य उद्देश्य सभी लोगों को अपने हिन्दू सनातन धर्म के अनोखे ज्ञान की गहराई से कुछ अंश उपलब्ध कराना है, क्योंकि हमारी सनातन संस्कृति पूरे ब्रह्मांड के व्यावहारिक ज्ञान का आधार हैं। यह संस्कृति जीवन के अलग-अलग आयामों के बारे में जानकारी देती हैं। यहाँ असंख्य ऋषि मुनियों ने तप करके जो ज्ञान अर्जित किया उसकी हर एक बून्द हमारे समाज के लिए एक बहुमूल्य उपहार है। हालाँकि मैं इतनी महान संस्कृति की व्याख्या करने के योग्य नहीं हूँ, फिर भी मेरी इष्ट देवी “माँ ललिता महात्रिपुरसुन्दरी” की कृपा से मैं इसमें जो कुछ भी लिख पाऊँगा, उसे मैं अपने ऊपर उनका आशीर्वाद ही मानूंगा।

मेरे परिचय में कहने के लिए ज़्यादा कुछ नहीं है। मेरा नाम शशि कान्त सिंघल है और मैं पिछले 25 वर्षों से कॉर्पोरेट जगत में एक उच्च वित्त प्रबंधक की यात्रा कर रहा हूँ लेकिन हृदय में आध्यत्मिकता और ज्योतिष रची बसी है। इसीलिए पिछले 6 वर्षो से इस पर कार्य कर रहा हूँ। ज्योतिष के क्षेत्र में मैंने वर्ष 2024 में IGNOU, नई दिल्ली से M.A. (JYOTISH) पूर्ण किया। इसके अतिरिक्त वर्ष 2021 में वाराणसी स्थित भारतीय वैदिक ज्योतिष संस्थान से “ज्योतिष विद्या विशारद” तथा 2020 में AIFAS, दिल्ली से “ज्योतिष रत्न” की उपाधि प्राप्त की। वर्ष 2021 में मैं अपने ज्योतिष गुरु श्री दीपांशु गिरि जी के संपर्क में आया और मेरी जिंदगी पूरी तरह से बदल गयी। उनके  मार्गदर्शन में निरंतर उन्नत ज्योतिष पाठ्यक्रमों का अध्ययन कर रहा हूँ। हालांकि उनके अलावा भी, मुझे अपनी ज्योतिष सिखने की यात्रा में अनेक गुरुओं का मार्गदर्शन मिला जिनमे श्री अभिजीत कृष्णन जी, श्री संजय रथ जी मुख्य है। अभी वर्तमान में, मैं एक आध्यात्मिक और ज्योतिष गुरु श्री दत्तात्रेय तापकीर जी के निर्देशन में ज्योतिष में PHD कर रहा हूँ।

बस इतना कह सकता हूँ कि जो भी ज्ञान मेरे पास है, वह मेरे सभी गुरुओं का आशीर्वाद है। मेरे गुरुओं ने मुझे ज्योतिष के साथ-साथ कई गुप्त रहस्यों के बारे में भी जानकारी दी। इस साइट के ज़रिए गुप्त ज्ञान की इस गंगा को आगे बढ़ाना ही मेरा लक्ष्य है।

एकादशी: केवल व्रत नहीं, एक ‘Cosmic Surgery’ है| इसका आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और ज्योतिषीय रहस्य

एकादशी: केवल व्रत नहीं, एक ‘Cosmic Surgery’ है| इसका आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और ज्योतिषीय रहस्य

एकादशी: केवल व्रत नहीं, एक ‘Cosmic Surgery’ है| इसका आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और ज्योतिषीय रहस्य

हिंदू धर्म में एकादशी को ‘व्रतों का राजा’ कहा गया है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसे “Healing Tithi” क्यों कहा जाता है? अक्सर हम इसे केवल एक धार्मिक अनुष्ठान मानकर चावल छोड़ने तक सीमित कर देते हैं, परंतु आइए हम इसको अपने गुरु जी के ज्योतिषीय दृष्टिकोण और आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर कसते हैं, तो इसके पीछे की ‘Internal Alchemy’ समझ आती है।

 

आइए, एकादशी के उस रहस्य को जानते हैं जो आपकी सेहत, भाग्य और DNA को बदल सकता है।

 

1.आध्यात्मिक गहराई: ऊर्जा का ऊर्ध्वगमन (Internal Alchemy)

 

आध्यात्मिक रूप से एकादशी का अर्थ है—11 इंद्रियों पर विजय (5 ज्ञानेंद्रियां, 5 कर्मेंद्रियां और 1 मन)।

 

  • शून्यता का सृजन: भगवान विष्णु ‘आकाश तत्व’ के स्वामी हैं। जब हम अन्न (पृथ्वी तत्व) का त्याग करते हैं, तो हमारे भीतर एक ‘शून्य’ (Space) पैदा होता है। इसी खाली स्थान में ईश्वरीय ऊर्जा का प्रवेश संभव है।
  • ऊर्जा का मार्ग: उपवास के दौरान शरीर की वह ऊर्जा जो भोजन पचाने में खर्च होती थी, वह अब ‘प्राण ऊर्जा’ बनकर सुषुम्ना नाड़ी में प्रवाहित होने लगती है, जिससे आत्म-साक्षात्कार की राह खुलती है।

 

  1. वैज्ञानिक आधार: ऑटोफैगी और सेलुलर रिपेयर

 

विज्ञान अब उस सत्य को स्वीकार कर रहा है जिसे ऋषियों ने हजारों साल पहले जान लिया था।

 

  • Autophagy (Self-Eating): 2016 के नोबेल पुरस्कार विजेता योशिनोरी ओहसुमी ने सिद्ध किया कि उपवास के दौरान शरीर की कोशिकाएं खुद के भीतर जमा कचरे और मृत कोशिकाओं को खाकर उन्हें ऊर्जा में बदल देती हैं। एकादशी का 24-36 घंटे का अंतराल शरीर की ‘Deep Cleaning’ के लिए पर्याप्त है।
  • चंद्रमा का प्रभाव: जैसे चंद्रमा समुद्र में ज्वार-भाटा लाता है, वैसे ही एकादशी पर हमारे शरीर के जल-तत्व और न्यूरॉन्स पर गहरा दबाव होता है। उपवास इस दबाव को संतुलित कर मानसिक उद्वेग को शांत करता है।

 

  1. मेरे गुरु जी का ‘Healing Tithi’ दृष्टिकोण

 

मेरे गुरुजी कहते है कि एकादशी आपकी कुंडली के ‘सॉफ्टवेयर’ को रिसेट करने का दिन है।

  • राहु का एंटीडोट: आज का युग ‘राहु’ (प्रदूषण, गैजेट्स, भ्रम) का है। एकादशी का व्रत राहु के इस ‘विषाक्त धुएं’ को सोख लेता है।
  • DNA की शुद्धि: मेरे गुरु कहते है कि कई बीमारियाँ हमारे पूर्वजों से (Karmic/Genetic Memory) आती हैं। एकादशी पर किया गया जप और तप इस ‘जेनेटिक लोड’ को कम करता है और रोगों की जड़ पर प्रहार करता है।
  • श्री विष्णु सहस्त्रनाम का विज्ञान: वे इस दिन श्री विष्णु सहस्त्रनाम सुनने या पढ़ने पर विशेष जोर देते हैं। यह ‘Sound Therapy’ है। भगवान के 1000 नामों की ध्वनि तरंगें हमारे शरीर के सूक्ष्म चक्रों को ‘अलाइन’ (Align) करती हैं और नसों (Nervous System) को हील करती हैं।

 

  1. रोगों के अनुसार एकादशी उपाय (Remedies)

 

यदि आप किसी विशेष समस्या से जूझ रहे हैं, तो एकादशी को एक औषधि की तरह उपयोग करें:

 

बीमारी / समस्या

ज्योतिषीय कारण

एकादशी उपाय (Healing Logic)

लिवर और कोलेस्ट्रॉल

खराब बृहस्पति (Jupiter)

उपवास लिवर के ‘सेल्स’ को रिपेयर करता है। इस दिन केसर युक्त जल का सेवन करें।

शुगर (Diabetes)

शुक्र और गुरु का दोष

उपवास मेटाबॉलिज्म को रिसेट करता है। इस दिन ‘वमन’ क्रिया (कुंजल) करना अत्यंत लाभकारी है।

मानसिक तनाव/डिप्रेशन

चंद्रमा और राहु का प्रभाव

निर्जला व्रत या केवल दूध का सेवन करें और ‘मौन’ रहें। यह न्यूरॉन्स को हील करता है।

कैंसर और गांठें (Tumors)

राहु की असामान्य वृद्धि

ऑटोफैगी मोड सक्रिय करने के लिए निर्जला एकादशी को ‘ब्रह्मास्त्र’ माना गया है।

आर्थिक तंगी

बुध और गुरु की कमजोरी

उत्तर दिशा की ओर मुख करके ‘विष्णु सहस्त्रनाम’ का पाठ करें। यह भाग्य की हीलिंग है।

 

 

  1. श्री विष्णु सहस्त्रनाम: एक ‘Vibrational Therapy’

 

मेरे गुरुजी एकादशी के दिन श्री विष्णु सहस्त्रनाम के पाठ या श्रवण पर बहुत जोर देते हैं।

  • इसमें 1000 नामों की जो ध्वनि तरंगें हैं, वे शरीर की नसों (Nervous System) और सूक्ष्म नाड़ियों को साफ करती हैं।
  • यह पाठ आपके DNA में संचित पूर्वजों के ‘कार्मिक बोझ’ को कम करने की क्षमता रखता है।
  • इस तिथि को इसका पाठ करके जो व्यक्ति अपने मानसिक संकल्प से इसका फल अपने पित्रों या पूर्वजो को अर्पित करता है, उसके सभी पित्र दोष खत्म हो जाते है और ये बहुत बड़ा कार्मिक उपाय है कि जो मनुष्य इस एकादशी के व्रत के साथ-साथ इस श्री विष्णु सहस्रनाम के जाप का फल अपने पूर्वजों को श्रद्धा पूर्वक अर्पित करता है उसके अनेक कार्य तो उसके पित्रों की कृपा से ही हो जाते है।

 

  1. भगवान विष्णु को यह तिथि प्रिय क्यों है?

 

भगवान विष्णु ‘पालनहार’ हैं। वे चाहते हैं कि उनके द्वारा रचित यह ‘मानव मशीन’ समय-समय पर अपनी सर्विसिंग करे। जब भक्त अपनी इंद्रियों को समेटकर विष्णु के ‘आकाश तत्व’ में लीन होता है, तो जीव और ब्रह्म के बीच का पर्दा हट जाता है। इसीलिए इस दिन को ‘हरिवासर’ कहा जाता है।

 

निष्कर्ष:

एकादशी कोई सजा नहीं, बल्कि ब्रह्मांड द्वारा दिया गया एक ‘Healing Gift’ है। यह वह दिन है जब आप ‘पदार्थ’ (Matter) से ऊपर उठकर ‘चेतना’ (Consciousness) की ओर कदम बढ़ाते हैं।

 

विशेष टिप: अगली एकादशी पर केवल पेट खाली न रखें, बल्कि मन को भी ‘डिजिटल कचरे’ (Social Media) से मुक्त रखें और विष्णु सहस्त्रनाम की तरंगों को अपने भीतर महसूस करें।

 

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