मेरे गुरु जी के अनुसार, वृषभ लग्न के लिए शनि का बाधकेश होना यह दर्शाता है कि आपका भाग्य एक ‘तिजोरी‘ में बंद है। शनि यहाँ वह ताला है जिसे खोलने के लिए आपको केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि कड़े कर्म करने की आवश्यकता है।
हालांकि मैंने इस series के पहले भाग में बताया था कि कौन से लग्न के लिए कौन सा भाव बाधक होता है लेकिन मेरे पास इस संबंध में भी काफी सवाल आ रहे है। इसको आसान करने के लिए मैंने एक कुंडली का diagram नीचे दिया है जिसमे सारे भाव लिखे है, बस आपको इतना देखना है कि आपकी कुंडली में पहले भाव में कौन सी राशि लिखी है। जैसे आज हम वृष या वृषभ लग्न की बात कर रहे है तो आपके अगर पहले भाव में 2 नंबर लिखा हुआ है तो ये आर्टिक्ल आपके लिए है। इसके लिए 9th हाउस या भाव बाधक होता है और इस 9th भाव में 10 नंबर लिखा होगा जिसके स्वामी शनि होते है।
- बाधकेश शनि का 12 भावों में “ताला और चाबी”
वृषभ लग्न में शनि जहाँ बैठता है, वहां वह आपको यह एहसास दिलाता है कि “भाग्य आपका साथ नहीं दे रहा”, लेकिन असल में वह आपसे उस भाव से जुड़ा एक विशेष ‘Act’ चाहता है:
भाव | प्रभाव (The Lock) | कर्मा-संशोधन (The Act/Remedy) |
1 (लग्न) | जातक बहुत गंभीर और चिंतित रहता है। भाग्य को कोसने की प्रवृत्ति। | चाबी: अपने व्यक्तित्व में ‘लचीलापन’ लाएं। बहुत अधिक जिद्दी न बनें। |
2 | पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद या धन के लिए बहुत ज्यादा संघर्ष। | चाबी: परिवार के बुजुर्गों की सेवा बिना किसी संपत्ति के लालच के करें। |
3 | छोटे भाई-बहनों से अनबन। व्यर्थ की यात्राएं जो फल न दें। | चाबी: अपने हाथों से लिखा हुआ कोई ज्ञान साझा करें (Handwritten notes)। |
4 | घर की नींव में समस्या या माता के साथ कर्मा का अटकना। | चाबी: पुराने या पुश्तैनी घर में कुछ निर्माण कार्य (जैसे मरम्मत) करवाएं। |
5 | संतान के साथ दूरी या अपनी स्किल्स का सही उपयोग न कर पाना। | चाबी: किसी गरीब बच्चे को वह स्किल सिखाएं जिसमें आप माहिर हैं। |
6 | अदृश्य ऋण या ऐसी बीमारी जो पकड़ में न आए। | चाबी: अपनी नौकरी में दूसरों की गलतियों को माफ करना सीखें। |
7 | वैवाहिक जीवन में ‘मैकेनिकल’ फीलिंग या पार्टनर का बहुत सख्त होना। | चाबी: पार्टनर के साथ धार्मिक यात्रा पर जाएं पर वहां मौन रहें। |
8 | अचानक काम रुकना या ससुराल पक्ष से कर्मा का जुड़ाव। | चाबी: जमीन के नीचे उगने वाली वस्तुओं (अदरक, मूली) का दान करें। |
9 | स्वग्रही बाधकेश: पिता या गुरुओं से वैचारिक मतभेद। | चाबी: मंदिर में जूते-चप्पल सीधे करने की सेवा करें। अहंकार का त्याग करें। |
10 | करियर में बहुत ऊँचाई पर पहुँचकर अचानक रुकावट आना। | चाबी: अपने जूनियर कर्मचारियों के साथ जमीन पर बैठकर खाना खाएं। |
11 | लाभ के पास पहुँचकर भी अवसर का हाथ से निकल जाना। | चाबी: बड़े भाई या पिता तुल्य व्यक्ति को कोई उपहार (बिना कारण) दें। |
12 | विदेश यात्रा में अड़चन या अस्पताल के चक्कर। | चाबी: अस्पताल में मरीजों के बैठने के लिए बेंच या पंखे का दान करें। |
- 27 नक्षत्रों की “सूक्ष्म चाबी” और नक्षत्र वृक्ष
मेरे गुरु जी के अनुसार, बाधकेश शनि जिस नक्षत्र में है, वह आपके DNA का वो ऋण है जिसे आपको ‘वृक्ष’ के रूप में धरती को वापस करना है:
नक्षत्र | नक्षत्र वृक्ष (पेड़) | कर्मा-क्रिया (The Act) |
1. अश्विनी | कुचला | लावारिस या बीमार पशुओं को भोजन और आश्रय दें। |
2. भरणी | आंवला | निर्धन कन्याओं की शिक्षा का बोझ उठाएं। |
3. कृतिका | गूलर | सामुदायिक रसोई (लंगर) में कोयला या ईंधन दान करें। |
4. रोहिणी | जामुन | अपनी माता को सफेद रंग की कोई वस्तु भेंट करें। |
5. मृगशिरा | खैर | किसी अंधे व्यक्ति को सड़क पार कराने या मदद करने का नियम बनाएं। |
6. आर्द्रा | पीपली | शनिवार को भगवान शिव पर काले तिल चढ़ाएं। |
7. पुनर्वसु | बांस | घर के कचरे को सही तरीके से रीसायकल (Recycle) करें। |
8. पुष्य | पीपल | पीपल के वृक्ष के नीचे तेल का दीपक जलाएं और वहां की मिट्टी छुएं। |
9. आश्लेषा | चंपा | पक्षियों के लिए मिट्टी के बर्तन में पानी रखें। |
10. मघा | बरगद | अपने पूर्वजों के नाम पर किसी सार्वजनिक स्थान पर बरगद लगाएं। |
11. पू. फाल्गुनी | पलाश | गरीब और संघर्षशील कलाकारों की आर्थिक मदद करें। |
12. उ. फाल्गुनी | पाकड़ | समाज के नियमों और ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन करें। |
13. हस्त | चमेली | अपने हाथों से कोई शारीरिक श्रम (जैसे घर की सफाई) नियमित करें। |
14. चित्रा | बेल | कारीगरों या निर्माण मजदूरों को काम के औजार दान करें। |
15. स्वाति | अर्जुन | पक्षियों को पिंजरे से आजाद कराने में योगदान दें। |
16. विशाखा | नागकेसर | किसी पुराने मंदिर के परिसर की झाड़ू से सफाई करें। |
17. अनुराधा | मौलश्री | अपने किसी पुराने मित्र की गुप्त रूप से आर्थिक मदद करें। |
18. ज्येष्ठा | रीठा | अपने खानदान के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति के साथ समय बिताएं। |
19. मूल | शाल | आश्रमों में जड़ वाली सब्जियां (आलू, जमीकंद) दान करें। |
20. पू. आषाढ़ा | अशोक | जल का संरक्षण करें और प्याऊ लगवाने में मदद करें। |
21. उ. आषाढ़ा | कटहल | जो भी कार्य हाथ में लें, उसे पूर्ण किए बिना न छोड़ें। |
22. श्रवण | आक | हनुमान जी को आक के फूलों की माला पहनाएं। |
23. धनिष्ठा | शमी | शमी के वृक्ष की सेवा करें और शनिवार को वहां दीपक जलाएं। |
24. शतभिषा | कदंब | सप्ताह में एक बार समुद्री नमक के पानी से घर में पोंछा लगाएं। |
25. पू. भाद्रपद | आम | शिव मंदिर की सीढ़ियों को अपने रुमाल से साफ करें। |
26. उ. भाद्रपद | नीम | किसी बीमार व्यक्ति को निःशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराएं। |
27. रेवती | महुआ | मछलियों को आटे की गोलियां खिलाएं। |
- मेरे गुरु जी का विशेष सिद्धान्त (वृषभ लग्न के लिए)
वृषभ लग्न का स्वामी शुक्र है (भोग) और बाधकेश शनि है (कर्म)। मेरे गुरु जी कहते हैं कि वृषभ लग्न वाले अक्सर अपने ‘आराम‘ (Comfort) की वजह से अपना भाग्य ब्लॉक कर लेते हैं।
- Master Remedy: शनिवार के दिन किसी पुराने निर्माण कार्य (Construction site) पर जाएं और वहां के मजदूरों को चप्पल या छाता दान करें।
- The Logic: शनि 9वें भाव (भाग्य) का स्वामी होकर बाधक है। जब आप समाज के सबसे निचले तबके (मजदूरों) की मदद करते हैं, तो शनि आपके भाग्य का ‘टोल गेट’ खोल देता है।
नोट- यहाँ पेड़ लिखने से तात्पर्य उसको लगाने और उसका पोषण करने से है और इसको लगाने से पहले योग्य व्यक्ति से परामर्श ले कि ये किस जगह लगाना उचित रहेगा क्योंकि बहुत से पेड़ घर पर नहीं लगाए जाते ।
अगला भाग (Part 4): मिथुन लग्न — जब 7वां भाव (साझेदारी) ही बन जाए सफलता की सबसे बड़ी दीवार। क्या है बुध के लग्न में गुरु का रहस्य?









