अभी मैं कुछ दिनों से कई कुंडलियों को देखने के दौरान लगभग एक जैसी सी समस्या देख रहा हूँ जोकि अधिकतर मंगल देव के कारण उत्पन्न हो रही है या इसको यूं कहे कि हमने खुद ही अपने कर्मो से अपने मंगल ग्रह को खराब कर लिया है। हालाकि मैंने पहले भी मंगल देव के स्वभाव को समझने के लिए दो लेख लिखे है जोकि आप लोग नीचे दिये गए लिंक पर देख सकते है।
क्यों आज हर दूसरी कुंडली “मांगलिक” है?
मंगल दोष निवारण और असाध्य रोग मुक्ति: भगवान मुरुगन और ‘सुब्रह्मण्य भुजंगम’ का दिव्य रहस्य
आज दोबारा से इसको थोड़ा सरल शब्दो में समझाने का प्रयास करता हूँ। वैदिक ज्योतिष में मंगल देव को केवल साहस या भूमि का स्वामी मान लेना इस ग्रह के साथ अधूरा न्याय है। ज्योतिष में, मंगल देव कालपुरुष की पहली राशि मेष (जन्म/जीवन) और आठवीं राशि वृश्चिक (मृत्यु/रूपांतरण) दोनों के स्वामी है। यानि कुंडली में पहले और आठवे भाव में कोई भी राशि हो लेकिन उसका मूल तत्व मंगल देव के अधीन है।
जीवन की पहली सांस (First Breath) से लेकर अंतिम सांस (Last Breath) तक की पूरी यात्रा का नियंत्रण मंगल देव के हाथ में है।
- रक्त और मातृभूमि: कहावत है कि “Blood is thicker than water”। अपने कुल के लोगों, भाई-बहनों और जिस मिट्टी में जन्म लिया है, उसके प्रति जो अदम्य खिंचाव होता है, वह मंगल देव का शुद्ध रूप है।
- पहला मददगार: जब जीवन पर संकट आता है, तो इंसान दर्शन या शास्त्रों की चर्चा नहीं करता; उसे तुरंत सहायता चाहिए होती है। पुलिस, सेना, एम्बुलेंस, अग्निशामक दल और आपातकालीन चिकित्सक—ये सभी मंगल देव के प्रत्यक्ष स्वरूप हैं।
- तृतीय भाव का रहस्य: मंगल देव कुंडली में तीसरे भाव के कारक है। तीसरा भाव पराक्रम का भाव है। दूसरे, इसका कारण यह भी है कि जब हम मुसीबत में होते हैं, तो सबसे पहले हम अपने भाई-बहनों या आपातकालीन सेवाओं को फोन करते हैं, क्योंकि हमें उन पर भरोसा होता है कि वे किसी भी परिस्थिति में हमारी मदद करेंगे। लेकिन सोचिए क्या होगा जब ये लोग हमारी पुकार का जवाब न दें? यदि मंगल देव बली है, तो कॉल उठाते ही मदद पहुंचेगी; यदि मंगल देव शापित या पीड़ित है, तो नेटवर्क कट जाएगा या मदद पहुंचने से पहले अनहोनी घट जाएगी। तीसरा भाव छोटे भाई-बहनों और ग्यारवा भाव बड़े भाई और दोस्तो को बताता है।
जब किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल देव की स्थिति अनुकूल होती है, तो उनका दृढ़ संकल्प सराहनीय और प्रेरणादायक होता है। ऐसे जातक निरंतर और दैनिक प्रयासों से जीवन में प्रगति करते हैं, चाहे वह प्रयास प्रतिदिन 1% ही क्यों न हो या 100%। लक्ष्य यह है कि काम को कैसे पूरा किया जाए और हर दिन समान रूप से किया जाए, न कि एक दिन में सब कुछ कर लिया जाए और दूसरे दिन उसे टाल दिया जाए। जिन लोगों की कुंडली में मंगल देव की स्थिति अनुकूल नहीं होती या जो लोग बहुत अधिक टालमटोल करते हैं, वे स्वयं अपना मंगल ग्रह नष्ट कर रहे होते हैं। किसी व्यक्ति की दैनिक आदतें मंगल ग्रह द्वारा नियंत्रित होती हैं, जो जीवन में और अधिक सफलता प्राप्त करने के लिए उसकी मानसिकता को आकार देती हैं।
जो लोग अपनी कार्यसूची तैयार करते हैं या अपने दैनिक कार्यों की योजना बनाते समय एकदम स्पष्ट और सटीक क्रियान्वयन करते हैं, उनकी कुंडली में मंगल देव की शक्ति अत्यंत प्रबल होती है, जो उन्हें जीवन के हर पहलू में सफलता दिलाती है। राहु देव की शक्ति से संचालित इस छल-कपट से भरी दुनिया में मंगल देव की प्रबल शक्ति होना वरदान है। याद रखें, मंगल देव ही वो ग्रह है जो राहु देव को नियंत्रित कर सकते है क्योंकि मंगल देव army commander यानि सेनापति की भूमिका में है और राहु देव army यानि सेना की भूमिका में है।
विशेष टिप – अगर किसी के लग्न में राहु देव बैठे हो और वो किसी प्रकार से अशुभ परिणाम दे रहे हो तो उन व्यक्तियों को माथे पर मंगल देव के कारक यानि कुमकुम/रोली तिलक लगाने की सलाह दी जाती है ताकि वे अराजक ऊर्जा से संतुलित ऊर्जा की ओर बढ़ सकें और मन में उच्च एकाग्रता और स्पष्टता प्राप्त कर सकें।
पीड़ित मंगल और कार्मिक ऋण का सिद्धांत
कुंडली में कोई भी ग्रह अकारण पीड़ित नहीं होता। पीड़ित मंगल इस बात का स्पष्ट कार्मिक प्रमाण है कि जातक ने अपने पूर्व जन्मों में (या इस जीवन के अतीत में) किसी ऐसे व्यक्ति की पुकार अनसुनी की थी, जब वो जीवन-मरण के संकट में था। पीड़ित मंगल देखने के लिए आपको कुंडली भी देखने की जरूरत नहीं है, बस आप केवल इतना देखो कि आपके अपने भाई और दोस्तो से संबंध कैसा है? अगर उनसे संबंध खराब है तो मंगल खराब है। या वो समय आने पर आपकी मदद के लिए तत्पर नहीं है तो भी मंगल खराब है और मदद न मिलना उनका दोष नहीं बल्कि आपका दोष है क्योंकि आपने भी उनको समय पर सहायता नहीं दी। ये इस जन्म में भी हो सकता है और पिछले जन्म में भी। मैंने पहले भी कहा है कि ग्रह और कही नहीं, हमारे ही आस-पास है।
ज्योतिष के अनुसार यदि मंगल पाप प्रभाव में अकेला पड़ जाए या अत्यधिक पीड़ित हो, तो ऐसे जातकों को जीवन के सबसे बड़े संकट के समय शून्य सहायता (Zero Help) मिलती है। सड़क दुर्घटनाओं में खून बहते रहने पर भी किसी का न रुकना, लूटपाट, हिंसक हमलों या बिना चिकित्सकीय सुविधा के तड़पकर दम तोड़ना—यह सब पीड़ित मंगल की कार्मिक छाया है।
मंगल देव के उपाय-
मंगल देव को ठीक करने के लिए सबसे पहले हमे उनके स्वभाव के अनुरूप चीजों को सही करना चाहिए क्योंकि अगर उनकी मूलभूत ऊर्जा को ही साध लिया जाय तो बाकी उपायो का प्रभाव स्वतः ही बढ़ जाता है।
मंगल ग्रह को बेहतर बनाने के लिए अपनी दिनचर्या में कुछ उपाय शामिल कर लेने चाहिए, जैसे-
- जैसे ही आप जागें, जमीन को स्पर्श करने से पहले धरती माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें। क्योंकि मंगल देव भूमि पुत्र है, इसलिए मंगल देवता को प्रसन्न करने के लिए सबसे पहले उनकी माता को धन्यवाद अर्पित करें और सुबह सबसे पहले धरती को प्रणाम करें।
- पहले चरण के बाद, दूसरा महत्वपूर्ण काम जो आपको करना चाहिए वह है हर हाल में अपना बिस्तर खुद बनाना। अनुशासन की मानसिकता शुरुआत से ही विकसित होती है और यदि कोई व्यक्ति सुबह जल्दी उठने में अनुशासित है, तो वह जीवन भर अनुशासित रहेगा। इस चरण को कभी न भूलें और इस आदत को अपने भीतर आत्मसात करें ताकि मंगल देवता के आनंद का अनुभव कर सकें।
- तीसरा, रोजाना व्यायाम जरूर करे क्योंकि मंगल देव की ऊर्जा को इससे channelize किया जा सकता है। आपको एक रहस्यमयी बात और बताता हूँ कि योग में कपालभांति आसन मंगल देव को represent करता है।
- चौथा, अपने भाइयों से अच्छे संबंध अच्छे रक्खे। जब उनको आपकी जरूरत हो, आप सदैव उनकी सहायता के लिए तत्पर रहे।
ये दैनिक बिना खर्च वाले आसान उपाय आपके जीवन में अमृत समान साबित हो सकते हैं।
अब बात करते है कि अगर कुंडली में मंगल देव काफी पीड़ित है या वो किन्ही कारणो से खराब फल दे रहे है तो हमारे ज्योतिष शास्त्रो में हनुमान जी, नरसिम्हा भगवान और भगवान कार्तिकेय की पूजा का विधान है। वैसे तो तीनों स्वरूप ही मंगल देव को प्रसन्न करने के लिए है लेकिन इनकी पूजा कुंडली में मंगल देव की स्थिति को देखकर decide की जाती है।
विशेष उपाय-
आज मैं मंगल देव के एक ऐसे चमत्कारिक उपाय का उल्लेख करूंगा, जिसे मेरे गुरु ने बताया था। जब आपको ऐसा लगे कि आप सब तरफ से शत्रुओं से घिर चुके हो, कोर्ट-कचहरी का दबाव चरम पर हो और चारों दिशाओं से आपकी मदद के रास्ते बंद हो जाएं तो यह उपाय सक्रिय होता है:
- नृसिंह स्तोत्र का पाठ: भगवान नृसिंह भगवान विष्णु के वे अवतार हैं जो खंभे को चीरकर बिना किसी पूर्व सूचना के (आपातकाल में) प्रह्लाद की रक्षा के लिए प्रकट हुए थे। भगवान नृसिंह अत्यंत उग्र और रक्षक स्वरूप हैं, जो भारी संकटों, विषमताओं और अचानक आने वाले उपद्रवों को शांत करते हैं।
नृसिंह स्तोत्र का लिंक भी यहाँ दिया जा रहा है –
https://sanskritdocuments.org/doc_vishhnu/nrisinhastotra.html
- मोरपंख का उपयोग: पाठ करते समय अपने दाहिने हाथ में एक मोरपंख पकड़कर रखें। मोरपंख नकारात्मक ऊर्जा और षड्यंत्रों को सोखने का कार्य करता है। कार्तिकेय भगवान मंगल देव के प्रत्यधिदेवता है और मोरपंख इनका प्रतीक है।
- अर्पण: पाठ पूर्ण होते ही उस मोरपंख को श्री संकटमोचन हनुमान जी महाराज के चरणों में अर्पित कर दें।
आप देखेंगे कि इस उपाय में मंगल देव के तीनों देव को सम्मिलित किया गया है।
इस उपाय से पीड़ित मंगल की कार्मिक ग्रंथि खुलती है और विपत्ति के क्षणों में अप्रत्याशित रूप से मित्रों, परिजनों या अजनबियों के माध्यम से त्वरित सहायता उपलब्ध हो जाती है।









