लेखक का परिचय
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सावन मास का अलौकिक रहस्य: ज्योतिषीय संबंध और शिव-चेतना से जुड़ने का महाविज्ञान

सावन मास का अलौकिक रहस्य: ज्योतिषीय संबंध और शिव-चेतना से जुड़ने का महाविज्ञान

सावन मास का अलौकिक रहस्य: ज्योतिषीय संबंध और शिव-चेतना से जुड़ने का महाविज्ञान

अभी 30 जुलाई से सावन का पवित्र महीना शुरू हो जाएगा और आपको हर जगह भगवान शिव के भक्त हाथो में कावड़ लाते हुए दिखाई देंगे। लेकिन क्या आप इस सावन माह की मूल ऊर्जा से परिचित है? चलिये आपको इसकी मूल ऊर्जा से परिचय कराते है।

सनातन संस्कृति में सावन (श्रावण) का महीना केवल पूजा-पाठ या परंपरा का पालन करने का समय नहीं है। यह संपूर्ण ब्रह्मांड और मानव शरीर के भीतर सोई हुई शिव-ऊर्जा को जागृत करने का अलौकिक समय है।

शिव पुराण में भगवान शिव स्वयं कहते हैं कि “जो मनुष्य सावन के इस दुर्लभ ऊर्जात्मक काल में संयम और अनुष्ठान से विमुख रहता है, वह मानो अपने हाथ में आए अमृत-कलश को स्वयं गिरा देता है।”

आने वाले सावन के इस पावन काल में, आइए समझते हैं कि कैसे ज्योतिष में ग्रह नक्षत्रो के माध्यम से भगवान शिव की असीम कृपा और ऊर्जा से जोड़ सकते हैं।

 

ज्योतिषीय एवं ब्रह्मांडीय रहस्य: शिव-शक्ति का मिलन

वास्तव में सावन का आरंभ तब होता है जब सर्वशक्तिमान सूर्य देव जल तत्त्व की राशि कर्क (Cancer) में प्रवेश करते हैं यानि कर्क संक्रांति से। हालांकि पंचांग के अनुसार इसका आरंभ गुरु पुर्णिमा के अगले दिन से माना गया है। हालाँकि उत्तराखंड में सावन को कर्क संक्रांति से शुरू हुआ माना जाता है। इसका आधार ज्योतिष और ऊर्जा-विज्ञान के दृष्टिकोण से निम्नलिखित है-

  • दक्षिणायन और आंतरिक यात्रा:- सूर्य का कर्क राशि में प्रवेश ‘दक्षिणायन’ के प्रारंभ का प्रतीक है। उत्तरायण जहाँ बाहरी वृद्धि और ज्ञान का समय है, वहीं दक्षिणायन मन, आत्मा और आंतरिक साधना का समय है। इस समय सूर्य (जो आत्मा के कारक हैं) चंद्रमा (जो मन के कारक हैं) के घर में आते हैं। यह मन और आत्मा के मिलन का काल है। क्योंकि अगर इसको अध्यात्मिक स्तर पर विभिन्न ग्रंथो के चश्मे से देखे तो भगवान शिव ही सूर्य है और माता पार्वती ही चन्द्र है।
  • पारद ऊर्जा (Parad Energy) की उत्पत्ति:- सूर्य की प्रचंड अग्नि/प्लाज्मा ऊर्जा जब चंद्रमा के शीतलता रूपी जल तत्व से मिलती है, तो ब्रह्मांडीय अंतरिक्ष में एक सूक्ष्म तत्त्व निर्मित होता है जिसे ‘पारद’ (Mercury) की ऊर्जा कहा जाता है। लिंग पुराण के अनुसार, सावन के महीने में पारद शिवलिंग का पूजन करने से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के कर्म-बंधन और पाप भस्म हो जाते हैं। पारद शिवलिंग के अंदर पारा और गंधक का समन्वय होता है जोकि भगवान शिव और माँ पार्वती के मिलन का प्रतीक है। इसकी गूढ़ गहराईं को समझने के लिए आप मेरा पारद शिवलिंग पर लिखा गया पिछला लेख पढ़ सकते है जिसका लिंक भी दे रहा हूँ-

पारद शिवलिंग—शिव-शक्ति के मिलन का दिव्य विज्ञान और ज्योतिषीय रहस्य

सावन माह को नागों का महीना कहा जाता है। पौराणिक कथाओं में नागों का विशेष उल्लेख मिलता है। राजा परीक्षित को डसने जा रहे तक्षक नाग और एक साधु के बीच का संवाद कर्मों के अकाट्य फल को स्पष्ट करता है:

  • जब तक्षक सर्प राजा परीक्षित का अंत करने जा रहा था, तब मार्ग में उसकी भेंट एक साधु से हुई जो राजा की रक्षा हेतु जा रहे थे। तक्षक ने साधु से कहा कि राजा का समय पूर्ण हो चुका है, इसलिए वे लौट जाएं।
  • साधु ने तक्षक के अपार ज्ञान और करुणा को देखकर पूछा—”यदि आपके पास इतना ज्ञान और विवेक है, तो आपको सर्प योनि कैसे प्राप्त हुई?”
  • तक्षक ने बताया कि पूर्व जन्म में मैं शहर का सबसे श्रेष्ठ पुरोहित था। मंत्रों का जैसा शुद्ध उच्चारण मैं कर सकता था, वैसा कोई नहीं कर पाता था। परंतु मैंने अपनी विद्या और योग्यता का उपयोग लोगों के मन में भय उत्पन्न करने, भावनात्मक ड्रामा करके धन कमाने और दूसरों के मन व संपत्ति पर नियंत्रण पाने के लिए किया। मेरी तीव्र इच्छा थी कि जो भी मुझे देखे, वह मुझसे डरे और मेरे नियंत्रण में रहे। परिणामस्वरूप, मुझे सर्प का जन्म मिला। आज मुझे भयभीत करने के लिए कुछ बोलना भी नहीं पड़ता—लोग केवल मुझे देखकर ही डर जाते हैं। मेरी इच्छा तो पूरी हुई, परंतु मुझे मानव शरीर खोना पड़ा, जो दूसरों के कल्याण के लिए बना था।

वैदिक ज्योतिष में तीन मुख्य नाग नक्षत्र माने गए हैं—आश्लेषा, ज्येष्ठा और उत्तराभाद्रपद।

  • नाग होने का वास्तविक अर्थ:- ‘नाग’ वे हैं जिनकी अब कोई लौकिक इच्छा शेष नहीं बची है। इसलिए सर्पों/नागों को अपार सिद्धियों, संपत्ति और रहस्यों का संरक्षक (Caretaker) बनाया गया है।
  • नाग योनि की त्रासदी:- पूर्व जन्म में अत्यधिक बुद्धिमान होने के बावजूद, नाग योनि मिलते ही जीव को यह अहसास होता है कि उसकी इच्छाएं तो पूरी हो गईं, लेकिन अब उसके पास न तो शारीरिक शक्ति है और न ही वह अधिक भोजन कर सकता है। पूर्व जन्म के अहंकार के कारण वह सीधा खड़ा भी नहीं हो सकता (उसे रेंगना पड़ता है)।
  • सबके द्वारा गलत समझा जाना:- जब भी कोई सर्प अपना फन उठाकर केवल खुद को व्यक्त करने की कोशिश करता है, लोग उसे खतरा मानकर मारने का प्रयास करते हैं। यही कहानी नाग नक्षत्रों (आश्लेषा, ज्येष्ठा, उत्तराभाद्रपद) के जातकों की भी होती है—ये अत्यंत ज्ञानी और समृद्ध होते हैं, परंतु समाज में इन्हें हमेशा गलत समझा जाता है। जब ये किसी का भला करने का प्रयास भी करते हैं, तब भी लोग इनके ऊपर संदेह करते हैं।

सावन में सूर्यदेव अश्लेषा नक्षत्र से गुजरते हैं, जिसके स्वामी स्वयं नाग (सर्प देवता) हैं। इस स्थान यानि कर्क राशि में आकर कालपुरुष कुंडली का पराक्रमी ग्रह मंगल (Mars) निर्बल और नीच महसूस करता है, क्योंकि यहाँ की जलमय और भावनात्मक ऊर्जा मंगल की उग्र कार्यशैली का समर्थन नहीं करती।

कर्क राशि वालों के लिए चेतावनी: जिन लोगों की जन्मपत्री में कर्क राशि में प्रमुख ग्रह स्थित हैं, उन्हें दूसरों के मनोभावों (Emotions) को ठेस पहुँचाने से अत्यधिक बचना चाहिए। अश्लेषा नक्षत्र वाले लोग माइंड गेम्स खेलने और मानसिक जाल बुनने के लिए जाने जाते है। ऐसे लोग भले ही इस जीवन में अपनी चालाकियों से जीत जाएं, लेकिन अंततः उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है। कर्क राशि के ग्रह शारीरिक कष्ट की तुलना में अत्यधिक कष्टकारी मानसिक व भावनात्मक पीड़ा प्रदान करते हैं।

सावन में मानसून के कारण केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि जीव-जंतु (जैसे मधुमक्खियां) भी भोजन जुटाने में कठिनाई का सामना करते हैं। यहाँ तक कि भोजन की कमी के कारण एक मधुमक्खी का समूह दूसरे समूह के भोजन पर डाका डालता है। ठीक इसी प्रकार, सावन में प्राकृतिक संसाधनों के लिए संघर्ष बढ़ जाता है। इसीलिए सावन में नागों और धरती के सूक्ष्म जीवों (चींटियों, कीड़ों) को अन्न-जल देना चाहिए, ये केवल दया नहीं है। यह हमारे पूर्व जन्मों के अहंकार, दमित इच्छाओं और जाने-अनजाने दूसरों को पहुँचाए गए मानसिक कष्टों का प्रायश्चित करने का सबसे सरल माध्यम है।

 

सावन में शिव-ऊर्जा और अपने कर्मो के संतुलन को ठीक करने के लिए अचूक उपाय

यदि आप इस सावन में शिव-कृपा प्राप्त करना चाहते हैं और अपने बिगड़े हुए कर्मो को संतुलित करना चाहते है तो इन उपायो को अवश्य अपनाएं:-

दैनिक शिव-साधना

  • घर में पारद शिवलिंग की स्थापना करे और उस पर प्रतिदिन शुद्ध जल, दूध, और बेलपत्र भावपूर्वक अर्पित करें। हो सके तो शुद्ध इत्र भी चढ़ाना चाहिए। जिनकी कुंडली में खासकर बुद्ध ग्रह से संबन्धित कोई भी समस्या हो उनके लिए यह उपाय अमृत-तुल्य है। लेकिन ये उपाय हर एक के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि बुध ग्रह वाले के लिए। इस पर चढ़ा हुआ अमृत तुल्य जल अपने घर के सारे कोनो में छिड़के और बचा हुआ जल किसी पौधे में अर्पित कर दे।
  • अगर पारद शिवलिंग ना ला सके तो मिट्टी (पार्थिव) के शिवलिंग का निर्माण भी कर सकते है लेकिन ये शिवलिंग हर दिन अलग बनेगा और बाद में इनको किसी गमले या पेड़ की जड़ में मिट्टी में ही अर्पित करना है।
  • ‘ॐ नमः शिवाय’ का अधिक से अधिक मानसिक जाप करें तथा हो सके तो इस माह के सोमवार और प्रदोष व्रत करे।

भूमिगत जल संरक्षण (Groundwater Replenishment)

  • कर्म का नियम: यदि किसी जातक की कुंडली में चौथे भाव या कर्क राशि में शनि स्थित है, तो इसका अर्थ है कि पूर्व जन्म में उसने किसी व्यक्ति को उसकी अत्यंत बुनियादी जरूरतों (जैसे भोजन, वस्त्र या सिर छिपाने की जगह/मकान) से वंचित करके मानसिक कष्ट दिया था।
  • परिणाम: इस जन्म में उस व्यक्ति को जीवन भर विश्राम नहीं मिलता। पर्याप्त धन होने के बाद भी वह लगातार काम में पिसता रहता है और बच्चों के साथ संबंध जटिल रहते हैं।
  • उपाय: इस कर्म को सुधारने के लिए सावन में अपने घर में Rainwater Harvesting (रेनवाटर हार्वेस्टिंग) या भूजल पुनर्भरण की व्यवस्था करें। जब आप पृथ्वी माता को जल वापस लौटाते हैं, तो आपका चौथा भाव और शनि देव शांत व प्रसन्न होते हैं। जल ही चंद्रमा है- जब आप पृथ्वी के जल को तृप्त करते हैं, तो आपकी कुंडली के मानसिक और पारिवारिक कष्ट स्वतः दूर हो जाते हैं।
  • यही उपाय वृश्चिक और मीन राशि या 4,8,12 भाव के ग्रहों के लिए भी अत्यंत कारगर है।

पृथ्वी और सूक्ष्म जीवों को मिष्ठान अर्पण

  • गुड़ व शहद का जल: प्रतिदिन सावन की संध्या में किसी वृक्ष (विशेषकर पीपल या बरगद) की जड़ में गुड़ का शर्बत, शहद मिला जल या दूध चढ़ाएं।
  • मीठे पकोड़े या चीला: बेसन और गुड़ के मीठे पकोड़े बनाकर चींटियों और भूमिगत जीवों के खाने के लिए खुले स्थान पर रखें।
  • आटे के सर्प अर्पित करना: गेहूं के गुंधे हुए आटे से छोटे-छोटे सर्प बनाएं, उन पर गुड़ का शर्बत छिड़कें और मिट्टी/पेड़ के पास अर्पित करें। यह उपाय असीम शांति और समृद्धि देता है।

जब आप सावन में लगातार एक सप्ताह (7 दिन) तक पृथ्वी को यह मीठा भोजन अर्पित करते हैं, तो आपके घर और जीवन की आभामंडल (Energy Field) में एक सकारात्मक बदलाव महसूस होता है।

नाग वे जीव हैं जो इस पूरी पृथ्वी की स्थिरता को बनाए हुए हैं और जिनके पास ब्रह्मांड का सारा गुप्त धन और ज्ञान है। वे आपसे किसी बड़ी चीज़ की अपेक्षा नहीं करते; केवल प्रकृति के प्रति कृतज्ञता की अपेक्षा रखते हैं।

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